तुम्हारी याद आयी है
एक मुस्कान लायी है,
कि मत पुछो गमों की
वो बरसात लायी है,
है मेरे हाथ में कुल्हड़,
लबों पे चाय की चुस्की
ज़हन में यादें है तेरी
वही पुरानी सी,
जो अक्सर भिड़ की तन्हाई में
मुझको घेरे रहते हैं,
मेरे तन्हाई का मतलब तो
बस इतना ही जानो तुम,
कि भरी बाजार भी तेरे बिना
तन्हा ही लगती है।
तुने तो कह दिया था न,
की आएगी नहीं तू अब
फिर आखिर क्यों अकेले में
तुम्हारी याद आयी है।
यकीं मानो नहीं अच्छा है इतनी सियासतें करना,
...... ... . विवेक तिवारी
एक मुस्कान लायी है,
कि मत पुछो गमों की
वो बरसात लायी है,
है मेरे हाथ में कुल्हड़,
लबों पे चाय की चुस्की
ज़हन में यादें है तेरी
वही पुरानी सी,
जो अक्सर भिड़ की तन्हाई में
मुझको घेरे रहते हैं,
मेरे तन्हाई का मतलब तो
बस इतना ही जानो तुम,
कि भरी बाजार भी तेरे बिना
तन्हा ही लगती है।
तुने तो कह दिया था न,
की आएगी नहीं तू अब
फिर आखिर क्यों अकेले में
तुम्हारी याद आयी है।
यकीं मानो नहीं अच्छा है इतनी सियासतें करना,
...... ... . विवेक तिवारी
No comments:
Post a Comment