बात तब की है जब हम क्लास 10th में थे बोर्ड की परीक्षा सुरु होने वाली थी। उस वक़्त हमारे स्कूल में क्लास 12th कि फे़यरवेल के साथ हमें गुड लक पार्टी मिलती थी। मेरे सारे दोस्त बहुत Exited थें की ब्रांड न्यू clothes , invitation और खाना। एक तरफ मै था जो बहुत खुश था कि किसी खास को पहली बार साड़ी में देखूंगा। क्लास की सबसे शांत लड़कीयों में से थी वो न ज्यादा बात न मस्ती बस किताबों में लगी रहती थी। मेरे दोस्तों के लिए भाभी बन चुकी थी वो और मैने आजतक उससे बात भी नहीं की थी। सब लड़के अपने cloth के colour और डिजाइन सोच रहे थें और मै सोच रहा था कि इस बार उससे बात तो कर लूंगा न। so finally हमलोग perfume वगेरह लगा के शूट बूट पहने स्कूल पहुंचे। वहाँ सभी को hall में बिठाया जा रहा था। कोई पढ़ाई की बात कर रहा था कोई pic click कर रहा था। लेकिन मैं उस भिंड में एक चेहरा ढूँढ रहा था। लेकिन उसकी फ्रेंड से पता चला की वो शायद नहीं आएगीआएगी बोली है पढ़ाई disturb होगी। मेरी तो सारी उम्मीदें ही धरी रह गईगई इतना सज धज कर आना ब्लेज़र पहनना सब मानो बेकार हो गया था। कुछ देर में announcement हुआ और सबको लाईन से venue की ओर ले जाया जाने लगा। मैं उस लाईन में सबसे पिछे खड़ा था और मेरे पिछे वो दरवाजा। मैं इसी इन्तजार में था की शायद वो आ जाये बार बार पिछे देखता। तभी पिछे से आवाज़ आती है - please hold the door for me. मैने पलट के देखा तो वो साड़ी संभालते हुए मेरे तरफ़ आ रही थी। दरवाजे पर कुछ सीढ़ी थी तो मैने हाथ आगे बढ़ाया और कहा संभलके.... पूरे टाइम उस साड़ी में खोई थी बार बार कह रही थी कि मम्मी कैसे पुरे दिन पहने रहती है। वो इस बात से अंजान थी कि कोई इसे इस साड़ी में हीं तो देखने आया था। वो आँखे जिनमें चस्मा रहती थी आज उनमें नूर था। वो स्माइल जो हमेशा किताबों में ढकी रहती थी आज सामने थी। उसके बालों कि एक लट बार बार उसके चेहरे पर आ जाती और वो बड़ी नजाकत से ठीक करती थी.....
Note- आगे की बातें अगले संस्करण में।
- विवेक तिवारी
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