Monday, August 19, 2019

शोषण से मुक्ति।

विगत सत्र में भारत कि संसद ने तीन तलाक निषेध विधेयक पारित कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ये निर्णय समाज में पनप रहे रूढ़िवादी विचारधारा के विरुद्ध युद्ध का ऐलान होना। और मुझे पूरा यकीन है कि इतिहास प्रधानमंत्री मोदी को ठीक उसी प्रकार याद रखेगा जैसे कि आज हम राजाराम मोहन राय और इश्वर चंद विद्यासागर को एक समाज सुधारक के तौर पर रखते हैं। क्योंकि तीन तलाक भी एक समाजिक कुप्रथा ही थी। इसके जरिये कट्टरपंथी मुस्लिम समाज ने लाखों महिलाओं का शोषण किया जो कि भारत जैसे देश के लिए बेहद ही शर्म की बात है। क्योंकि भारत कि विचारधारा समानता, महिला सशक्तिकरण और मातृ पुजन के इर्दगिर्द घुमती है। और तीन तलाक जैसी कुप्रथा मुख्य तौर समानता के अधिकार का विरोधी है। क्योंकि इसके विच्छेद कि प्रक्रिया पूरी तरह से एक पक्षीय है। इसमें महिलाओं के पक्ष को सुने बिना तलाक ए बिद्दत का तुगलकी फरमान सुना दिया जाता है। इसलिए भारत के लिए ये बेहद जरुरी था कि वो अपने संविधान का पालन करते हुए उसमें अंकित समानता के अधिकार को प्रभावी करे। और इसके विरोध में खड़ी रूढ़िवादी विचारधारा के फन को कुचले। 

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